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Entertainment News: राज बब्बर की 1980 की फिल्म का वो प्रेम गीत, जिसे आज भी सुनकर ताजा हो जाती हैं मोहब्बत की यादें

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | राज बब्बर और रंजीता कौर की 1980 की फिल्म से जुड़ा मशहूर प्रेम गीत आज भी लोगों की पसंद बना हुआ है। जानिए इस गीत की खास कहानी।

हिंदी सिनेमा में कुछ गीत ऐसे होते हैं जो अपनी फिल्म से निकलकर कई पीढ़ियों की यादों का हिस्सा बन जाते हैं। 1980 में आई राज बब्बर और रंजीता कौर की फिल्म का गीत ‘तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है’ भी ऐसा ही एक सदाबहार गीत है, जिसकी लोकप्रियता फिल्म की रिलीज के दशकों बाद भी कायम है।

यह गीत केवल अपनी मधुर धुन की वजह से खास नहीं बना, बल्कि इसके पीछे प्रेम की ऐसी भावना है, जिसमें किसी अपने को जिंदगी का अभिन्न हिस्सा मान लेने की बात कही गई है। यही भाव इसे आज भी सुनने वालों के दिल के करीब रखता है।

राज बब्बर और रंजीता की जोड़ी ने बनाया यादगार

अंबरीश संगल के निर्देशन में बनी फिल्म ‘आप तो ऐसे ना थे’ में राज बब्बर, रंजीता कौर और दीपक पराशर प्रमुख भूमिकाओं में दिखाई दिए थे। फिल्म की कहानी और किरदारों के बीच रिश्तों को गीतों ने भावनात्मक रूप से मजबूत किया।

‘तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है’ इसी भावनात्मक दुनिया का महत्वपूर्ण हिस्सा था। राज बब्बर और रंजीता कौर पर फिल्माया गया यह गीत प्रेम और रिश्तों की जटिल भावनाओं को पर्दे पर खूबसूरती से पेश करता है।

एक गीत, अलग आवाजें और अलग भाव

इस गीत की सबसे दिलचस्प बात इसका अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल होना है। गीत के अलग संस्करणों में अलग आवाजों का इस्तेमाल किया गया, जिससे फिल्म के दृश्यों के हिसाब से इसका भाव भी बदलता नजर आया।

मोहम्मद रफी की आवाज में इसका संस्करण खास तौर पर लोकप्रिय हुआ। उनकी आवाज की गहराई ने गीत के रोमांटिक और भावुक पक्ष को बेहद प्रभावशाली बना दिया। फिल्म में इसे प्रेम त्रिकोण से जुड़ी परिस्थितियों के साथ जोड़ा गया था।

हेमलता की आवाज में भी इस गीत का इस्तेमाल किया गया। उनके संस्करण को फिल्म में ऐसे भावनात्मक प्रसंग से जोड़ा गया, जहां किरदार अपने प्यार और उससे जुड़ी यादों में डूबा हुआ दिखाई देता है।

यानी एक ही गीत को कहानी की अलग-अलग परिस्थितियों के मुताबिक इस्तेमाल करने का प्रयोग इस फिल्म के संगीत को खास बनाता है।

निदा फाजली की कलम से निकली प्रेम की गहराई

इस गीत के बोल मशहूर शायर और गीतकार निदा फाजली ने लिखे थे। उनकी लेखनी की खासियत यह थी कि वह प्रेम जैसी भावनाओं को बहुत सहज शब्दों में गहराई दे देते थे।

‘तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है’ में भी प्रेम को सिर्फ आकर्षण के रूप में नहीं बल्कि किसी व्यक्ति के जीवन का हिस्सा बन जाने की अनुभूति के तौर पर सामने रखा गया।

यही कारण है कि गीत के शब्द समय बीतने के बावजूद पुराने नहीं लगते। प्रेम की भावना हर दौर में एक जैसी रहने के कारण यह गीत नई पीढ़ी के श्रोताओं को भी अपनी ओर खींचता है।

उषा खन्ना के संगीत ने दिया सदाबहार रंग

गीत के संगीत की जिम्मेदारी उषा खन्ना ने संभाली थी। उनकी धुन ने निदा फाजली के शब्दों को ऐसा संगीतात्मक आधार दिया, जिससे गीत की भावनात्मकता और बढ़ गई।

मोहम्मद रफी जैसी महान आवाज और संवेदनशील गीत लेखन के साथ संगीत का यह मेल गीत को यादगार बनाने में सफल रहा।

आज जब संगीत की दुनिया में गीतों का अंदाज तेजी से बदल रहा है, तब भी इस तरह के पुराने गीत अपनी सादगी और भावनात्मक गहराई के कारण श्रोताओं के बीच अपनी जगह बनाए हुए हैं।

फिल्म से ज्यादा गीत के लिए याद की जाती है फिल्म

‘आप तो ऐसे ना थे’ में राज बब्बर, रंजीता कौर और दीपक पराशर के अलावा मदन पुरी और ओम शिवपुरी जैसे कलाकार भी नजर आए थे।

फिल्म अपने दौर की कहानी और कलाकारों के कारण चर्चा में रही, लेकिन समय के साथ इसका सबसे मजबूत जुड़ाव ‘तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है’ गीत के साथ बना रहा।

कई दर्शकों के लिए फिल्म का नाम सामने आते ही यह गीत याद आ जाता है। यही किसी सदाबहार गीत की सबसे बड़ी सफलता मानी जा सकती है कि वह अपनी फिल्म से अलग होकर भी लोगों की स्मृतियों में जीवित रहे।

आज भी क्यों पसंद आता है यह गीत?

इस गीत की लोकप्रियता के पीछे कई वजहें हैं। इसकी धुन सहज है, शब्द भावनात्मक हैं और आवाज में वह ठहराव है जो सुनने वाले को गीत के साथ जोड़ देता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गीत प्रेम को किसी दिखावे के बजाय आत्मीयता के रूप में पेश करता है। यही वजह है कि इसे सुनते हुए आज भी पुराने दौर के प्रेम, रिश्तों और हिंदी सिनेमा की सादगी की याद आती है।

करीब पांच दशक का समय गुजरने के बावजूद ‘तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है’ की लोकप्रियता यह साबित करती है कि अच्छे गीत समय की सीमा में बंधे नहीं होते। जब शब्द दिल से जुड़े हों और संगीत भावनाओं को छू जाए, तो गीत पीढ़ियां बदलने के बाद भी सुना जाता है।

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